: पान खाते ही होता है यहाँ दोस्ती का इज़हार
Mon, Feb 20, 2023
इंदौर/आलीराजपुर : भगोरिया पर्व की शुरुआत तत्कालीन राजा भोज के समय से हुई थी, उस समय दो भील राजाओं ने अपनी राजधानी में भगोर मेले का आयोजन शुरू किया था, इसके बाद दूसरे भील राजाओं ने भी अपने क्षेत्रों में इसका अनुसरण शुरू कर दिया, उस समय इसे भगोर कहा जाता था, वहीं स्थानीय हाट और मेलों में लोग इसे भगोरिया कहने लगे, इसके बाद से ही आदिवासी बाहुल्य इलाकों में भगोरिया उत्सव मनाया जा रहा है। इस उत्सव मे आदिवासी बच्चे अपने जीवनसाथी की तलाश करते है और उन्हें पान खिलाकर अपने प्यार का इजहार करते है यदि सामने वाले ने पान खा लिया तो इसका मतलब दोनों मे प्यार होकर एक दोस्ती को जीवनसाथी बनाने के लिए सहमति प्रदान कर दी है, इसी परंपरा के माध्यम से अधिकतर आदिवासी समाज मे विवाह बंधन तय होता है। इसी संस्कृति को नजदीक से निहारने के लिए विश्व विख्यात किशोर का चिंतन KKC क्लब एवं संगीत सेवा सहारा भी अपने 30 से अधिक साथियों के साथ इस संस्कृति को देखने और मस्ती करने के लिए इंदौर से आलीराजपुर के छकतला गाँव मे 5 मार्च को श्री कैलाश जी गुरबानी के नेतृत्व मे जा रहा है।
भगोरिया के मेलों में आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है, आदिवासी लोगों की अलग-अलग टोलियां मेले में बांसुरी, ढोल और मांदल बजाते नजर आते हैं, इस दौरान आदिवासी लड़कियां भी मेले में सजधज कर आती हैं, वह पूरी तरह से पारंपरिक वेश-भूषा में होती हैं, साथ ही मेले में हाथों पर टैटू भी गुदवाती हैं, भिन्न भिन्न प्रकार के इतर लगाकर आने का शौक नयी पीढ़ी के आदिवासी बच्चो मे देखने को मिलता है, अनगिनत लोगो की भीड़ मे अलग अलग प्रकार के नृत्य बरबस ही हम सबका मन मोह लेते है और नृत्य करने को हम भी मजबूर हो जाते है। भगोरिया मेले के दौरान खाने के लिए भी अलग-अलग चीजें विशेष रूप से गुड़ की जलेबी, भजिया, पान और ताड़ी की डिमांड ज्यादा होती है, मेले में आए लोग अलग-अलग आदिवासी व्यंजनों का लुत्फ उठाते हैं। खासकर दाल पानिया की मांग सभी दूर होती है।
भगोरिया मेले में आदिवासी युवक और युवतियों के रिश्ते भी तय होते हैं, मेले में आदिवासी युवतियां पारंपरिक वेश-भूषा में आती हैं, इसके साथ ही वह नृत्य भी प्रस्तुत करती हैं, परिवारों की सहमति से भगोरिया मेले में आदिवासी युवक और युवतियों के रिश्ते भी तय होते हैं, इस मेले में युवतियां अपनी पसंद से लड़कों का चुनाव करती हैं, लड़का या लड़की एक दूसरे को पान खिलाकर अपनी दोस्ती का इज़हार करते है और यदि पान खा लिया तो मान्यता है की परिवार के लोग उसके साथ उसकी शादी कराते हैं।
: लता मंगेशकर की स्मृति मे मिलें सुर मेरा तुम्हारा, सुमन चौरसिया को इंदौरी लता पुरस्कार
Wed, Feb 8, 2023
इंदौर : 8 बार गायन के क्षेत्र में विश्व रिकॉर्ड बनाने बाली संस्थान केकेसी मैत्री क्लब एवं संगीत सेवा सहारा द्वारा स्वर कोकिला भारत रत्न इंदौर में जन्मी लता जी मंगेशकर की प्रथम पुण्यतिथि पर 5 फरवरी रविवार को 93 कलाकारो द्वारा श्रद्धांजलि देने हेतु एक संगीतमय आयोजन किया जो अभिनव कला समाज गांधी हॉल में हुआ, इस आयोजन में इंदौर के अतिरिक्त देवास, बड़वानी, जलगांव, नागदा एवं अन्य शहरों से भी कलाकार आए, इस अनूठे आयोजन में इंदौरी लता पुरस्कार लता ग्रामोफोन संस्थान के श्री सुमन चौरसिया को अतिथि एवं संगीत प्रेमियों के समक्ष प्रदान किया गया, यह पुरस्कार 5100 रुपए नगद राशि और सम्मान पत्र के रूप में था।
संस्थान के अध्यक्ष दीपक पाठक ने बताया की लता जी की स्मृति में पुण्यतिथि पर हुए इस आयोजन में लता जी की उम्र के बराबर 93 कलाकारों ने अपने गीतों के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की। उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के महोबा से ब्लाइंड स्टार कलाकार ग्रुप के 7 दिव्यांग बच्चे अपनी प्रस्तुति देने के लिए इस आयोजन में स्पेशल रूप से आए थे, ये ब्लाइंड ग्रुप उत्तरप्रदेश के कई शहरों में अच्छी प्रस्तुति के लिए कई पुरस्कार जीत चुका है। आयोजन में मुख्य अतिथि श्री अजातशत्रु, पंडित योगेंद्र महंत, डॉक्टर भरत शर्मा, श्री रमण रावल, श्री प्रवीण खारीवाल, श्री दीपक बाबा, श्री हरि अग्रवाल, श्री विनय जैन एवं सभी उपस्थित संगीत प्रेमियों के माध्यम से इंदौरी लता पुरस्कार श्री सुमन चौरसिया को प्रदान किया गया, संस्थान के निवेदन पर अतिथियों ने सुमन चौरसिया के रेकॉर्ड संग्रह को शासन स्तर पर सहयोग करने का आश्वासन दिया है। आयोजन में 5 वर्ष के बच्चे से लेकर 80 वर्ष तक के बुजुर्ग ने लता जी को 14 घंटे तक गीतों के माध्यम से सतत श्रद्धांजलि अर्पित की।
संस्थान की संयोजक श्रीमती रेखा रावल ने अतिथियों, गायक कलाकारों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।