: होली के रंग संगीत सेवा सहारा के संग, मन की अभियक्ति
Tue, Mar 7, 2023
बसंत गया चहुं ओर बसंती बयार चलने लगती है, चारों तरफ आम में मोर खिल उठते हैं, गुलहर के पेड़ों पर लाल पीले रंग के फूल खिलने लगते हैं और सब तरफ मौसम खुशनुमा हो जाता है,हल्की शीत एवम ग्रीष्म ऋतु का एहसास होने लगता है शीतल पवन बहकर हमारे मन को आनंदित करती है और हमारे मन को सुकून पहुंचाती हैं, हम उन हवाओ में बहने लग जाते हैं, और उधर आम के मोर अपनी खुशबू से प्रकृति को सराबोर कर देते हैं, फिर धीरे धीरे जैसे जैसे समय बीतता जाता है और हम रंगों के पर्व होली की तैयारी में जुट जाते हैं,जगह जगह होलिका के दहन की तैयारियां शुरू हो जाती है बाजारों में दुकानें रंग बिरंगी पिचकारियों से सज जाते हैं एवम तरह तरह के रंगो से दुकानें सज जाती हैं बाजारों में दुकानों में ठंडाई एवम मिठाइयों की बाहर सी आ जाती है एवम शक्कर के मीठे जेवर मिलने लग जाते हैं,और घर घर कई तरह के पकवान बनने की खुशबू आने लगती हैं,किसी के यहां मठरी बनने लग जाती हैं किसी के यहां गुजियों की तैयारी होने लगती है किसी के यहां दही बड़े बनने की शुरुवात होने लगती है,और बच्चों की खुशियों का तो तो ठिकाना ही नहीं रहता है फिर बड़ों को भी इस त्यौहार का बेसब्री से इंतजार रहता है और सब लोग अपनी अपनी टोलियों के साथ इस त्यौहार को मनाते हैं।
फिर इस त्यौहार को बरसाने में लट्ठ मार होली के रूप में मनाते हैं वहां महिलाएं लट्ठ से अपने आदमियों को मारती हैं,और वो अपने आपको को बचाते हैं,ये एक बहुत पुरानी परंपरा है और लोग आज भी उस परंपरा को निभाते आए हैं इस प्रकार ब्रज में होली के पर्व की बड़ी धूमधाम रहती है,क्योंकि हमारे कान्हा को होली का त्यौहार बहुत प्रिय है तो वहां तो इस त्यौहार का बहुत महत्व है
और बाकी जगह भी इस त्यौहार को अलग अलग तरीके से मनाया जाता है,फिर ये त्यौहार हसी एवम खुशी का रहता है तो सब इस त्यौहार को बड़े उमंग एवम खुशी से मनाते है कहीं इस त्यौहार के दिन लोग शाम को नए वस्त्र पहनकर अपने वालों से होली मिलने के लिए जाते हैं सब एक दूसरे को होली के पर्व की शुभकामनाएं देते हैं इस तरह ये त्यौहार कहीं खुशी का रहता है कहीं दुःख का रहता है सब अपने वालों से मिलकर इस त्यौहार का आनंद लेते हैं एवम दुःख सुख बाटते हैं और बड़े सौहार्द एवम प्रेम से मिलकर इस त्यौहार को खुशी खुशी मनाते हैं।
जयश्री अत्रे - खंडवा
: सब के संग कान्हा रास रचाये-खेले होली रे - अनिल गुप्ता ग्वालियरी
Tue, Mar 7, 2023
सब के संग कान्हा रास रचाये
सब के संग खेले होली रे
श्याम ने ऐसो रंग लगायो
श्याम ने ऐसो रंग चढा़यो
श्याम रंग में यो रंग गई राधा
राधा ना रही गोरी रे
मोर-मुकुट, कमर मुरलिया
श्याम हाथ पिचकारी रे
तोड़ के, माखन लूटे
मन मोहन-गिरधारी रे
मन को भाये
श्री कृष्ण की लीला
उनकी माखन चोरी रे
श्याम ने ऐसो रंग चढा़यो--
नटखट-माखन चोर की बातें
मधुर मनोहर लागे रे
मधुर-मनोहर बंसी धुन सुन
प्रेम सभी उर जागे रे
खिचे जा रहे मन-मोहन से
बंधे प्रेम की डोरी रे
श्याम ने ऐसो रंग चढायो--
रंग लगाये, रास रचाये
माखन चोर मुरारी रे
श्याम-रंग में रंग सब मस्त है गये
सुध-बुध खोये नर-नारी रे
'अनिल'
कृष्ण-प्रेम रंग चढे़ बिना
जीवन-पाती कोरी रे
श्याम ने ऐसो रंग चढायो
गीतकार-अनिल गुप्ता ग्वालियरी
: बेटी की पुकार - डॉ रेखा दशोरा
Tue, Mar 7, 2023
युग बीता पर उसमें अब तक ,
आई नहीं दरार है ,
बेटा और बेटी के बीच ,
भेदभाव की दीवार है।
सामाजिक सोंच और विषमताएं
दिन रात उसे पोषित करती हैं ,
असमानता का जहर जडों को ,
गति लिए पक्का करती हैं ।
क्षमताओं और भावनाओं के ,
साक्ष्य बेटी जब देने जाती है,
हर बार ही निष्फल रहती है ,
हर बार आघात ही खाती है ।
संपत्ति हो या शिक्षा ,
भेद सदा है बरता जाता,
स्त्री कोख से जन्म लेकर भी ,
पुरुष ही बन जाता है विधाता।
कितने ही कानून बना दो ,
विकास हेतु चाहे करो प्रचार ,
मानसिकता में बदलाव बिना ,
नारी को नहीं मिलेंगे अधिकार।
परिवर्तन तो लाना होगा ,
घर घर अलख जगाना होगा ,
विश्व गुरु बनने के लिए ,
आंगन को समतल बनाना होगा।
डॉ रेखा दशोरा