: दिल-दिमाग रहेगा फिट सुनिये अपनी पसंद का म्यूजिक, जानिए संगीत के फायदे
Mon, Jun 17, 2024
आजकल की जेनेरेशन को म्यूजिक सुनना काफी पसंद होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोज अपना पसंदीदा गाना सुनकर आप अपने दिल की सेहत को भी दुरूस्त रख सकते हैं, आमतौर पर मेंटल हेल्थ के लिए म्यूजिक को काफी फायदेमंद माना जाता है, हालांकि म्यूजिक इससे भी कहीं ज्यादा प्रभावशाली है, मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ म्यूजिक हमारे दिल के सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता है, कई परीक्षण में दावा किया गया है कि रोजाना कम से कम 30 मिनट तक अपना पसंदीदा गाना सुनने पर दिल से संबंधित समस्याओं में राहत मिलती है, इसके अलावा म्यूजिक आपको खुश रखने का काम भी करता है।
दरअसल अपने पसंद का म्यूजिक सुनने से शरीर में डोपामाइन नाम का हैप्पी हार्मोन रिलीज होता है जो हमें खुशी और एक्साइटमेंट महसूस करवाता है, म्यूजिक दिल की सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है, दिल की बीमारियों से जूझ रहे लोगों को म्यूजिक सुनने की सलाह दी जाती है, दरअसल जब हम अपना पसंदीदा गाना सुनते हैं तो हमारे दिमाग से एंडोर्फिन नाम का हार्मोन रिलीज होता है यह हार्मोन दिल से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मददगार होता है अगर आपको भी दिल संबंधी कोई समस्या है तो कम से कम आधे घंटे तक रोज अपनी पसंद के गाने सुनें. म्यूजिक सुन कर आप अपना तनाव कम कर सकते हैं जब आप तनाव महसूस करें तो नेचुरल, क्लासिकल और मेडिटेशन म्यूजिक का सहारा लें इस तरह के म्यूजिक से आपका मन शांत होगा और आपका तनाव बहुत जल्दी गायब हो जाएगा, तनाव कम कर के मूड बेहतर रखने के अलावा म्यूजिक हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।
सुनने में शॉकिंग लग सकता है लेकिन यह सच है. दरअसल, म्यूजिक सुनने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन का स्तर काफी कम होता है, जबकि स्ट्रेस हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है इसीलिए म्यूजिक की मदद से स्ट्रेस लेवल कम कर के आप बीमारियों से लड़ने की ताकत को बढ़ा सकते हैं रोज आधे घंटे अपने पसंद का म्यूजिक सुनने से आप दिन भर खुशनुमा महसूस कर सकते हैं जब हम अपना पसंदीदा गाना सुनते हैं तो हमारा शरीर डोपामाइन नाम का हैप्पी हार्मोन रिलीज करता है, डोपामाइन रिलीज से हमें खुशी और एक्साइटमेंट महसूस होता है अपना मूड खुशनुमा रखना चाहते हैं तो रोज कुछ देर के लिए अपने पसंद के गाने सुनें।
: मातृशक्ति और विक्रमादित्य फाउंडेशन द्वारा इंदौर मे पौधारोपण
Mon, Jun 17, 2024
इंदौर: मातृशक्ति और विक्रमादित्य फाउंडेशन द्वारा पौधारोपण का कार्यक्रम किया गया आजाद नगर थाने में थाना प्रभारी नीरज मीना जी के नेतृत्व में पौधारोपण का कार्यक्रम हुआ जिसमें उपस्थित नायब तहसीलदार पलकेश परमार जी महिला बाल विकास अधिकारी दीपिका सिंह और डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर विजेंद्र सिंह ठाकुर , वंश मालवीय,कृष्ण जी विपिन जी ,डॉली पवार ,रेनू सोलंकी ,अल्का गुप्ता ,चारूल गंगवानी , कविता राजपूत जी अधिवक्ता राजपूत कविता सोलंकी जीएनजीओ के साथी गण उपस्थित रहे।
जब से दुनिया शुरू हुई है, तभी से इंसान और क़ुदरत के बीच गहरा रिश्ता रहा है। पेड़ों से पेट भरने के लिए फल-सब्ज़ियां और अनाज मिला। तन ढकने के लिए कपड़ा मिला। घर के लिए लकड़ी मिली। इनसे जीवनदायिनी ऑक्सीज़न भी मिलती है, जिसके बिना कोई एक पल भी ज़िन्दा नहीं रह सकता। इनसे औषधियां मिलती हैं। पेड़ इंसान की ज़रूरत हैं, उसके जीवन का आधार हैं। अमूमन सभी मज़हबों में पर्यावरण संरक्षण पर ज़ोर दिया गया है। भारतीय समाज में आदिकाल से ही पर्यावरण संरक्षण को महत्व दिया गया है। भारतीय संस्कृति में पेड़-पौधों को पूजा जाता है। विभिन्न वृक्षों में विभिन्न देवताओं का वास माना जाता है। पीपल, विष्णु और कृष्ण का, वट का वृक्ष ब्रह्मा, विष्णु और कुबेर का माना जाता है, जबकि तुलसी का पौधा लक्ष्मी और विष्णु, सोम चंद्रमा का, बेल शिव का, अशोक इंद्र का, आम लक्ष्मी का, कदंब कृष्ण का, नीम शीतला और मंसा का, पलाश ब्रह्मा और गंधर्व का, गूलर विष्णू रूद्र का और तमाल कृष्ण का माना जाता है। इसके अलावा अनेक पौधे ऐसे हैं, जो पूजा-पाठ में काम आते हैं, जिनमें महुआ और सेमल आदि शामिल हैं। वराह पुराण में वृक्षों का महत्व बताते हुए कहा गया है- जो व्यक्ति एक पीपल, एक नीम, एक बड़, दस फूल वाले पौधे या बेलें, दो अनार दो नारंगी और पांच आम के वृक्ष लगाता है, वह नरक में नहीं जाएगा।