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: पान खाते ही होता है यहाँ दोस्ती का इज़हार

पान खाते ही होता है यहाँ दोस्ती का इज़हार

इंदौर/आलीराजपुर : भगोरिया पर्व की शुरुआत तत्कालीन राजा भोज के समय से हुई थी, उस समय दो भील राजाओं ने अपनी राजधानी में भगोर मेले का आयोजन शुरू किया था, इसके बाद दूसरे भील राजाओं ने भी अपने क्षेत्रों में इसका अनुसरण शुरू कर दिया, उस समय इसे भगोर कहा जाता था, वहीं स्थानीय हाट और मेलों में लोग इसे भगोरिया कहने लगे, इसके बाद से ही आदिवासी बाहुल्य इलाकों में भगोरिया उत्सव मनाया जा रहा है। इस उत्सव मे आदिवासी बच्चे अपने जीवनसाथी की तलाश करते है और उन्हें पान खिलाकर अपने प्यार का इजहार करते है यदि सामने वाले ने पान खा लिया तो इसका मतलब दोनों मे प्यार होकर एक दोस्ती को जीवनसाथी बनाने के लिए सहमति प्रदान कर दी है, इसी परंपरा के माध्यम से अधिकतर आदिवासी समाज मे विवाह बंधन तय होता है। इसी संस्कृति को नजदीक से निहारने के लिए विश्व विख्यात किशोर का चिंतन KKC क्लब एवं संगीत सेवा सहारा भी अपने 30 से अधिक साथियों के साथ इस संस्कृति को देखने और मस्ती करने के लिए इंदौर से आलीराजपुर के छकतला गाँव मे 5 मार्च को श्री कैलाश जी गुरबानी के नेतृत्व मे जा रहा है।

भगोरिया के मेलों में आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है, आदिवासी लोगों की अलग-अलग टोलियां मेले में बांसुरी, ढोल और मांदल बजाते नजर आते हैं, इस दौरान आदिवासी लड़कियां भी मेले में सजधज कर आती हैं, वह पूरी तरह से पारंपरिक वेश-भूषा में होती हैं, साथ ही मेले में हाथों पर टैटू भी गुदवाती हैं, भिन्न भिन्न प्रकार के इतर लगाकर आने का शौक नयी पीढ़ी के आदिवासी बच्चो मे देखने को मिलता है, अनगिनत लोगो की भीड़ मे अलग अलग प्रकार के नृत्य बरबस ही हम सबका मन मोह लेते है और नृत्य करने को हम भी मजबूर हो जाते है। भगोरिया मेले के दौरान खाने के लिए भी अलग-अलग चीजें विशेष रूप से गुड़ की जलेबी, भजिया, पान और ताड़ी की डिमांड ज्यादा होती है, मेले में आए लोग अलग-अलग आदिवासी व्यंजनों का लुत्फ उठाते हैं। खासकर दाल पानिया की मांग सभी दूर होती है।

भगोरिया मेले में आदिवासी युवक और युवतियों के रिश्ते भी तय होते हैं, मेले में आदिवासी युवतियां पारंपरिक वेश-भूषा में आती हैं, इसके साथ ही वह नृत्य भी प्रस्तुत करती हैं, परिवारों की सहमति से भगोरिया मेले में आदिवासी युवक और युवतियों के रिश्ते भी तय होते हैं, इस मेले में युवतियां अपनी पसंद से लड़कों का चुनाव करती हैं, लड़का या लड़की एक दूसरे को पान खिलाकर अपनी दोस्ती का इज़हार करते है और यदि पान खा लिया तो मान्यता है की परिवार के लोग उसके साथ उसकी शादी कराते हैं।

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