: होली के रंग संगीत सेवा सहारा के संग, मन की अभियक्ति
बसंत गया चहुं ओर बसंती बयार चलने लगती है, चारों तरफ आम में मोर खिल उठते हैं, गुलहर के पेड़ों पर लाल पीले रंग के फूल खिलने लगते हैं और सब तरफ मौसम खुशनुमा हो जाता है,हल्की शीत एवम ग्रीष्म ऋतु का एहसास होने लगता है शीतल पवन बहकर हमारे मन को आनंदित करती है और हमारे मन को सुकून पहुंचाती हैं, हम उन हवाओ में बहने लग जाते हैं, और उधर आम के मोर अपनी खुशबू से प्रकृति को सराबोर कर देते हैं, फिर धीरे धीरे जैसे जैसे समय बीतता जाता है और हम रंगों के पर्व होली की तैयारी में जुट जाते हैं,जगह जगह होलिका के दहन की तैयारियां शुरू हो जाती है बाजारों में दुकानें रंग बिरंगी पिचकारियों से सज जाते हैं एवम तरह तरह के रंगो से दुकानें सज जाती हैं बाजारों में दुकानों में ठंडाई एवम मिठाइयों की बाहर सी आ जाती है एवम शक्कर के मीठे जेवर मिलने लग जाते हैं,और घर घर कई तरह के पकवान बनने की खुशबू आने लगती हैं,किसी के यहां मठरी बनने लग जाती हैं किसी के यहां गुजियों की तैयारी होने लगती है किसी के यहां दही बड़े बनने की शुरुवात होने लगती है,और बच्चों की खुशियों का तो तो ठिकाना ही नहीं रहता है फिर बड़ों को भी इस त्यौहार का बेसब्री से इंतजार रहता है और सब लोग अपनी अपनी टोलियों के साथ इस त्यौहार को मनाते हैं।
फिर इस त्यौहार को बरसाने में लट्ठ मार होली के रूप में मनाते हैं वहां महिलाएं लट्ठ से अपने आदमियों को मारती हैं,और वो अपने आपको को बचाते हैं,ये एक बहुत पुरानी परंपरा है और लोग आज भी उस परंपरा को निभाते आए हैं इस प्रकार ब्रज में होली के पर्व की बड़ी धूमधाम रहती है,क्योंकि हमारे कान्हा को होली का त्यौहार बहुत प्रिय है तो वहां तो इस त्यौहार का बहुत महत्व है
और बाकी जगह भी इस त्यौहार को अलग अलग तरीके से मनाया जाता है,फिर ये त्यौहार हसी एवम खुशी का रहता है तो सब इस त्यौहार को बड़े उमंग एवम खुशी से मनाते है कहीं इस त्यौहार के दिन लोग शाम को नए वस्त्र पहनकर अपने वालों से होली मिलने के लिए जाते हैं सब एक दूसरे को होली के पर्व की शुभकामनाएं देते हैं इस तरह ये त्यौहार कहीं खुशी का रहता है कहीं दुःख का रहता है सब अपने वालों से मिलकर इस त्यौहार का आनंद लेते हैं एवम दुःख सुख बाटते हैं और बड़े सौहार्द एवम प्रेम से मिलकर इस त्यौहार को खुशी खुशी मनाते हैं।
जयश्री अत्रे - खंडवा
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