: मां तो आखिर होती है मां - आरुषी
मां तो आखिर होती है मां
अपने सपनों को त्यागकर
रातों को जागकर
हमारी ख्वाहिश करती है पूरी।
उनके बिना ज़िंदगी अधूरी
ममता मयी आंचल है जिनका।
जिनकी,
खुशियों की होती है
मां की आंखों में करुणा की ज्योति।
रिश्तों को यह संजोए रखती
सारे दर्द खुद ही सह लेती और
मौत से भी लड़ जाती हैं।
आरुषी - पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड।
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