: ए खुदा मुझे फिर वही माँ देना - सौम्या डोबरियाल
ए खुदा मुझे फिर वही माँ देना।
फिर वही गोद और,
उसी का आसरा देना।
घुटनों से रेंगते-रेंगते,
कब पैरो पर खड़ा हुआ।
तेरी कदमों की मिट्टी,
जन्नत की धूल है।
सुबह सवेरे मुझे उठाती,
गुड़िया कह कर मुझे जगाती।
मेरी मम्मी,मेरी जान,
रखती मेरा पूरा ध्यान।
तेरे बिना अधूरा,
लगता ये जहाँ है।
मैं कितना चेहरा पढ़ती हूँ।
माँ तुझसा कोई मिलता ही नहीं,
सारे दुखो को हर लेती हैं।
बीमार हो कर भी,
सारे काम कर लेती है।
सौम्या डोबरियाल - पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड
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