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: संघर्ष की देवी है माँ - मनीषा नाडगौडा

admin

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Mon, May 8, 2023
संघर्ष की देवी है माँ - मनीषा नाडगौडा

माँ शब्द में ही स्वर्ग की मिठास
तेरे अमृततुल्य रसपान से हो अपनेपन का एहसास
बखान की न सिमा बंधन अतूट
ये पंचतत्व तेरी चरणों के ऋणी है माँ
वेद पुराण शास्त्रों की पहचान तु माँ
तू ही तो मानव का आरम्भ हो माँ
बचपन जवानी का नूर हो तुम
प्रौढ़ावस्था का अनुभव हो तुम
चरणो में तेरे चारों धाम बसे माँ
पढ़ाया लिखाया जीने के काबिल बनाया
घर संसार मेरा बसाकर
मातृ देवो भव का दृष्टान्त दिया
मुझे आकार देते देते तेरा आकार बदल गया
न महसूस हुवा मुझे न परिवार वालों को
सींचा तेरी ममता नें हमे,
आज लगता है, हें माँ मैनें दुःख दर्द के सिवाय तुम्हें क्या दिया
तुलना उसकी करते सागर सरिता बहुतों सेे है
उसकी मूरत सूरत को
अपार उपमा से तोलते है
लेकिन उम्र के एक मोड़ पे आकर सोचते है
माँ को हमनें क्या दिया? उसने तो जन्नत दी हमें
बेंटी बिहाकर गयी, बेटों नें अपना बसेरा संजोया
उसका अकेलापन हमनें कभी महसूस किया ही नही
फिर भी अंत तक उसका हौसला बुलंद रहता है
लगता हैं प्यार करने की अदा सिर्फ माँ से सीखे
नमन उसके साहस त्याग बलिदान को
माँ तूम जीवन दायिनी हो
ना समझा कोई आज तक
तेरा अंतस्पन्दन तेरा अंतस्पन्दन

मनीषा नाडगौडा - बेलगाम, कर्नाटक

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