: माँ को जो पुत्र वृद्धाश्रम में रखे... - रामेश्वर शांडिल्य
माँ तो जग में महान है।
माँ तो ममता की खान है।
माँ की श्रद्धा पूजा प्रेम भक्ति से
वैभव लक्ष्मी आती मकान है।
माँ से बढ़कर जग में कोई नहीं
स्नेह प्रेम की मीठी जबान है।
माँ की महिमा वो क्या जाने
जो हिंसक पशु या अज्ञान है।
माँ शिक्षा की प्रथम पाठशाला
जहां मिलता संस्कार ज्ञान है।
माँ खुद भूखी प्यासी रहकर
बच्चो पर लुटती जान है।
माँ को जो पुत्र वृद्धाश्रम में रखे
दुनिया में सबसे बड़ा शैतान है।
रामेश्वर शांडिल्य - ग्राम मेलनाड़ीह, बिलासपुर छ ग
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