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: मेरी प्यारी मां - अभिधा विरमाल

मेरी प्यारी मां - अभिधा विरमाल

सीधी - साधी भोली - भाली,
मां तू कितनी अच्छी है,
चाहे कोई कुछ भी कह ले -
जग में एक तू ही सच्ची है ।

घुटनों से रेंगते- रेंगते,
न जाने कब खड़ी हुई माँ,
तेरी ममता की छांव में -
न जाने कब बड़ी हुई माँ।

रात भर जागते रहना,
तबीयत बिगड़ जाने पर,
हर पल मेरा ख्याल रखना
सोना न एक भी पहर।

खाना पहले हमें खिलाती,
बाद में तुम खाती हो मां,
हमारी खुशी में तुम खुश हो-
अपना दर्द भूल जाती मां।

संस्कार हमें तुम बतलाती,
अच्छे बुरे का भेद समझाती,
हमारी गलतियों को सुधारती-
सही ग़लत का फर्क बताती ।

तुझमें ही भगवान है बसता ,
हमको तुझसे जीवन मिलता,
तेरे कदमों में स्वर्ग हे रहता -
तुझसे ही ये संसार हे चलता।

आज भी मुझको दर्द होता तो
दर्द तुझको भी होता है ,
मां बेटी का रिश्ता दुनिया में -
कितना सुंदर होता है।

दिल करता है सब छोड़कर
सीने से तेरे लग जाऊं मैं
सारी दुनिया को भूलकर
आंचल में तेरे छुप जाऊं मैं।

कितने खुशनसीब है हम ,
मां तुम हमारे पास हो ,
इस संसार का सबसे अच्छा -
कितना सुंदर एहसास हो ।

ईश्वर ने तुझमें अपना ,
सुंदर रूप रचाया है ,
इस संसार में सबसे प्यारा -
मां, उसने तुझे बनाया है।

अभिधा विरमाल - इन्दौर

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