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: दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कला माँ की लोरियां हैं - मन कमलहन्स गुप्ता

दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कला माँ की लोरियां हैं - मन कमलहन्स गुप्ता

माँ और परमात्मा दोनों खूबसूरत सम्बन्ध एक दूजे के पर्याय एक दूजे के पूरक, परमात्मा में माँ छिपी है और माँ ही परमात्मा का स्वरूप है ये जगजाहिर है, क्या मिसाल दे मन माँ की, क्या तुलना करें माँ की किसी और से, इस धरा पर सर्वप्रथम मिलन और पूजन माँ का होता है, शायद ईश्वर या परमात्मा का भी नहीं अतः पहले माँ फिर परमात्मा फिर ये धरा यानी धरती माँ, परमात्मा भी धरती पर कलाएं लेकर आया पर दुनियां में सर्वश्रेष्ठ कला अगर कुछ है तो वो माँ की लोरियां।

एक बच्चा जिस क्षण पैदा होता है माँ भी उसी समय पैदा होती है उससे पहले तो वो एक औरत मात्र होती है और माँ की महानता देखो उन 9 महीनों में माँ स्वयं को मृत्यु के सम्मुख खड़ा कर देती है जो शायद कोई और ना कर सके, एक बच्चा माँ के पास जो बढ़ता है जिस गति से उसका विकास होता है उसका कारण एकमात्र माँ होती है, माँ का ध्यान होता है माँ की केयर होती है माँ चाहे दूर हो पास हो चाहे दूसरे कमरे में हो हजारो काम मे उलझी हो या सेकड़ो मील दूर ही क्यों ना हो माँ का ध्यान माँ का अंतर्मन अपने बच्चे में ही होगा क्योकि माँ एक बिना शर्त का प्यार है और ऐसा ख्याल सिर्फ माँ रख सकती है और माँ की तरह कोई ख्याल रख पाए ये सिर्फ ख्याल ही हो सकता है।

भगवान हर जगह नहीं जा सकता शायद इसीलिए उसने अपने प्रतिरूप में माँ बनाई, परमात्मा ने दो आंखे बनाई देखने के लिए पर खुद नजर आता है बन्द आंख से, वो परमात्मा भी तरसा माँ की ममता को इसलिए वो भी जन्मा माँ की कोख से, दुनियां में जब जब रिश्तों की बात होगी मां से बढ़कर कुछ ना होगा कोई भी अगर ये दुनियां छोड़ जाता है तो हर रिश्ता कुछ समय याद रखता है बस माँ ही होती है जो जब तक जियेगी अपने बच्चे को पल पल याद करेगी, माँ को लिखा जा सके ये इस मन के बस की बात नहीं इसलिए सर्वश्रेष्ठ सर्वाधिक सर्वप्रथम पहली पायदान पर माँ और सिर्फ माँ ही है।

माँ के लिए कोई मन क्या लिखेगा जबकि माँ ने स्वयं हर मन को लिखा हैं।

मन कमलहन्स गुप्ता (माण्डलियां), इंदौर

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